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आखिर तटों के अलावा और क्या है खास केरल में? ( Kerala Backwaters)

केरल दर्शन के पहले चरण में मैं आपको ले चला था इसकी सुकूनभरी तटों की और। तटों के अलावा भी भला ऐसा क्या है केरल में जो बेहद खास है? जी हाँ! अप्रवाही जल या यूँ कहें बैकवाटर जो की अनेक नदियों, झीलों, नहरों और सागरीय जल से बना एक अनूठा जलतंत्र है। अल्लेप्पी बैकवाटर पर्यटन का मुख्य गढ़ है, परन्तु मैं आपको ले चलूँगा कोवलम से 16 किमी दूर स्थित पूवार के बैकवाटर की ओर।       यूँ तो समूचे केरल में ही बैकवाटर का जलतंत्र फैला पड़ा है, उनमे से कुछ पर्यटन हेतु विकसित किये गए हैं  तिरुवनंतपुरम से 16 किमी की दुरी पर पूवार एक छोटा सा जगह है, जो की अल्लेप्पी का विकल्प है। यहाँ पर पानी के इस विशाल तंत्र में रातें गुजारने के लिए हाउसबोट उपलब्ध रहते हैं। दिसंबर-जनवरी के महीने में तो यह यात्रा काफी महँगी हो जाती है। लेकिन साथ ही जल-विहार हेतु छोटे मोटरबोट भी उपलब्ध हैं। वैसे जून में तो ऑफ-सीजन के वजह से हमें सिर्फ पंद्रह सौ रूपये में ही बोट मिल गयी, वरना जाड़े के मौसम में इनका भाव पच्चीस सौ से ऊपर ही होता है। ज्यों ही हमारी जलयात्रा प्रारम्भ हुई, दोनों तरफ से...

केरल के इन सुकूनभरी तटों पर भी एक नजर (Kovalam Beach, Kerala)

केरल, एक ऐसा राज्य जिसका नाम आते ही मन में भारतीय मानचित्र के त्रिभुजाकार दक्षिणी हिस्से की छवि उभर कर आती है। घनी हरियाली से आच्छादित पर्वतमालाएं, नारियल-केले के पेड़ और अरब सागर के लहरों को स्पर्श करती इसकी तटों का तो कोई जवाब ही नहीं है।  आयुर्वेद के खज़ाने से भरे और चन्दन के पेड़ों से सुगन्धित वन केरल के अमूल्य धरोहर हैं। कण-कण में बसी हरियाली ही इस राज्य की मुख्य पहचान है। अगर पर्यटन के दृष्टिकोण से देखा जाय तो लोग यहाँ - मुख्यतः समुद्रतटों और अप्रवाही जल यानि बैकवाटर्स एवं हाउसबोट का आनंद लेने आते हैं। बैकवाटर और हाउसबोट का मुख्य गढ़ तो अल्लेप्पी में है, लेकिन तटों के मामले में तो कोवलम ही सर्वश्रेष्ठ है।            कोयंबटूर से रातभर की ट्रेन यात्रा कर सुबह सुबह केरल की सीमा प्रवेश करते ही सिर्फ नारियल व केले के घने-घने जंगलो और अनगिनत जलाशयों की जो हरी-भरी श्रृंखला प्रारंभ हुई, केरल की काल्पनिक छवि जो मेरे मन में थी, उसे धीरे-धीरे हकीकत में बदलते हुए पाया। राजधानी त्रिवेंद्रम या तिरुवनंतपुरम से मात्र 16 किमी की ही दुरी प...