बहुत से पर्यटक पुरी आते हैं पर चिल्का नहीं आकर यहाँ के रोमांच से वंचित रह जाते हैं। मेरा मन तो पुरी जाने से पहले ही चिल्का की गहराई में डुबकी लगा रहा था। पुरी के मंदिरों में घूमने के बाद हमारा अगला पड़ाव था झीलो की रानी चिल्का में। पुरी से मात्र 55 किलोमीटर की दुरी हमने ऑटो से तय की और पहुँच गए खारे पानी के सबसे बड़े झील में। रास्ते में अनेक छोटे बड़े जलाशय हमारा स्वागत कर रहे थे। पशु पछियों की चिल्कारियाँ कानो में गूँज रही थी। ज्यो ही हमने आस पास नजर दौड़ाया, पाया की झील में नौका विहार करने की उत्तम व्यवस्था है। आस पास जलपान आदि के लिए रेस्टॉरेन्ट उपलब्ध थे जहाँ समुद्री भोजन का मजा भी आप उठा सकते हैं। अनेक मोटर चालित नौकाएं झील में तय की जाने वाले दुरी के अनुसार अलग अलग दरों पर उपलब्ध थे। हमने भी एक नौका सोलह सौ रूपये में दो घंटे के लिए बुक करवाया। सुबह के करीब ग्यारह बजे हम नौका में बैठ गए। ऐसा लगा मानो आज झील के रास्ते हम सागर से ही मिलने जा रहे हैं। पक्षियों की कलरव कानो में मधु घोल रही थी। धीरे धीरे हमारा सफ़र आगे बढ़ता चला गया। जैसे जैसे आगे बढ़ते गए नए नए...
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