घुमक्कडी या घूमना जिसे आम तौर पर लोग महज एक शौक के रूप में ही देखते हैं, वास्तव में यह इससे कहीं बढ़कर है। आम तौर पर घूमने वाले दो किस्म के होते हैं। एक साधारण पर्यटक होते है, छुट्टी लेकर साल में एकाध बार किसी यात्रा पर निकलते हैं। और एक वे होते हैं जिनका घूमना जूनून होता हैं। वे किसी नियम या कार्यक्रम में बिना बंधे हुए अकस्मात् कभी भी कहीं भी निकल सकते हैं। घुमक्कड़ प्रायः कम और सिमित संसाधनों में ही यात्रा करते हैं, जबकि पर्यटक सुख सुविधाओं से लैस होकर। वैसे पर्यटक और घुमक्कड़ के बीच क्या अंतर है, यह तो एक बहुत बड़ा विषय है जिसपर काफी लंबा लिखा जा सकता है। लेकिन सवाल यह है की आखिर घूमने की जरुरत ही क्या है? अगर पैसे खूब हैं तो आराम से घर में सारे भोग विलास के साधन जुटा कर मजे की ज़िन्दगी काटी जा सकती है। फिर क्या जरुरत है घर से बाहर निकल कर परेशानी उठाने की? यात्रा का जोखिम उठाने की? बस, रेल या हवाई जहाज सब जगह जोखिम ही जोखिम तो है! आज का दौर तो दुर्घटनाओं का दौर है भाई, फिर क्यों न घर में ही "सुरक्षित" रह लिया जाय? आखिर क्यों यह पोस्ट लिखने को मैं आज मजबूर हुआ? ...
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