आगरा यात्रा के दूसरे चरण में मैं आपको ले जाऊंगा एक ऐसी जगह जो आगरा से मात्र ३७ किमी पर ही स्थित है। देखने तो हम सिर्फ ताजमहल आये थे पर जिनलोगों ने इसे बनाया था उनका भी अतीत जानने के लिए यहाँ आना नितांत आवश्यक है। इसीलिए सूरज की झुलसाती तपिश की परवाह न करते हुए हम निकल पड़े आगरा से मात्र एक घंटे की दुरी पर फतेहपुर सिकरी में, मुगलों द्वारा नियोजित प्रथम शहर जिसे अकबर ने बसाया था। सुबह आठ बजे का वक़्त था और रास्ते में भी अनेक मुगलकालीन स्मारकों को देखते हुए जाना था। आगरा से कुछ ही दूर बढ़ने पर हम आ गए थे सिकंदरा में। यहाँ किसी जमाने में अकबर की महफ़िल सजती थी। उस जमाने की कलाकृतियों को आप यहाँ बहुत करीब से देख सकते है और आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रह सकते। रंग बिरंगी फूलो जैसी आकृति वाले पत्थरों पे की गई नक्काशियां वास्तव में एक उत्कृष्ट स्थापत्य कला का उदहारण है। अगर आप एक एक पत्थर को भी गौर से देखे तो आपको सिर्फ एक दीवार की आरजू उतारने में सारा दिन गुजर जायगा। नीचे के चित्र में आप सिकंदरा में अकबर के मकबरे का एक द्वार देख सकते हैं। यह ...
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