बिहार के गया से लगभग तीस किलोमीटर दूर एक गाँव है गहलौर (अत्री ब्लॉक), पहाड़ी के किनारे किनारे जाती एक लम्बी वीरान सी सड़क, एक ओर से पूरी तरह पहाड़ी से घिरे होने के कारण सबसे नजदीकी शहर (वजीरगंज) जाने के लिए सत्तर-अस्सी किलोमीटर का लम्बा चक्कर, और तो और पीने का पानी भी लाने के लिए रोजाना पहाड़ी के ऊपर चढ़कर तीन किलोमीटर का कठिन पथरीला डगर । तो ये थी बिहार के उस सुदूर गाँव के वशिंदों की पीड़ा । लेकिन ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन चुके इस पर्वत को झुकाने वाले युगपुरुष का प्रादुर्भाव भी शायद अब हो ही चुका था । गेहलौर घाटी: दशरथ मांझी पथ एक दिन पर्वत पार करने के क्रम में ही एक महिला लड़खड़ा कर गिर जाती है और उसका मटका फूट जाता है । बोध गया: एक एतिहासिक विरासत (Bodh Gaya, Bihar) दशरथ मांझी: पर्वत से भी ऊँचे एक पुरुष की कहानी (Dashrath Manjhi: The Mountain Man) मगध की पहली राजधानी- राजगीर से कुछ पन्ने और स्वर्ण भंडार का रहस्य (Rajgir, Bihar) नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष: एक स्वर्णिम अतीत (Ruins of ...
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