Skip to main content

Posts

Showing posts with the label उत्तर प्रदेश

नेपाल से वापसी- बनारस में कुछ लम्हें (Banaras- Nepal IV)

पिछले पोस्टों में आपने पढ़ा - पहले जमशेदपुर से काठमांडू तक की बस यात्रा, फिर काठमांडू से लेकर पोखरा तक के दिलकश नज़ारे। इन चार पांच दिनों में मन इस हिमालयी देश में पूरी तरह रम चुका था। क़भी भी यह महसूस ही नहीं हुआ की हम किसी दूसरे देश में घूम रहे हैं, बल्कि सबकुछ अपने देश जैसा ही था वहां। वक़्त भी अब वापसी का हो चला था और पोखरा से विदा लेने की बारी आ गयी। इस बार हमने भारत-नेपाल के एक अन्य सीमा सनौली बॉर्डर जो जमशेदपुर से नेपाल (काठमांडू) तक की बस यात्रा (Jamshedpur to Nepal By Bus) काठमांडू के नज़ारे- पशुपतिनाथ, बौद्धनाथ, भक्तपुर दरबार और नागरकोट- नेपाल भाग -2 (Kathmandu- Nepal Part-II) काठमांडू से पोखरा- सारंगकोट, सेती नदी, गुप्तेश्वर गुफा और फेवा झील (Pokhara- Nepal Part-III) नेपाल से वापसी- बनारस में कुछ लम्हें (Banaras- Nepal IV)  गोरखपुर के समीप है,  से होते हुए वापस जाने का निर्णय लिया। पोखरा से सनौली बॉर्डर तक जाने में पांच-छह घंटे का समय लगा। फिर सनौली से गोरखपुर दो घण्टे का रास्ता था। वापसी यात्रा बिलकुल ही अनियोजित थी इसिलिए जगह जगह हमें स्टेशन बदल बदल कर जाना ...

फतेहपुर सिकरी: जिसे अकबर ने बसाया फुरसत से (Fatehpur Sikri: First Planned City of Mugals)

आगरा यात्रा के दूसरे चरण में मैं आपको ले जाऊंगा एक ऐसी जगह जो आगरा से मात्र ३७ किमी पर ही स्थित है। देखने तो हम सिर्फ ताजमहल आये थे पर जिनलोगों ने इसे बनाया था उनका भी अतीत जानने के लिए यहाँ आना नितांत आवश्यक है। इसीलिए सूरज की झुलसाती तपिश की परवाह न करते हुए हम निकल पड़े आगरा से मात्र एक घंटे की दुरी पर फतेहपुर सिकरी में, मुगलों  द्वारा नियोजित प्रथम शहर जिसे अकबर ने बसाया था। सुबह आठ बजे का वक़्त था और  रास्ते में भी अनेक मुगलकालीन स्मारकों   को देखते हुए जाना था।  आगरा से कुछ ही दूर बढ़ने पर हम आ गए थे सिकंदरा में।  यहाँ किसी जमाने में अकबर की महफ़िल सजती थी। उस जमाने की कलाकृतियों को आप यहाँ बहुत करीब से देख सकते है और आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रह सकते।  रंग बिरंगी फूलो जैसी आकृति वाले पत्थरों पे की गई नक्काशियां वास्तव में एक उत्कृष्ट स्थापत्य कला का उदहारण है। अगर आप एक एक पत्थर को भी गौर से देखे तो आपको सिर्फ एक दीवार की आरजू उतारने में सारा दिन गुजर जायगा।  नीचे के चित्र में आप सिकंदरा में अकबर के मकबरे का एक द्वार देख सकते हैं। यह ...

झुलसाती धुप में ताजमहल का दीदार (Tajmahal, Agra)

पिछले हफ्ते मैंने मुम्बई एवं गोवा की यात्रा की। गोवा में जब मैं अपने दोस्तों के साथ घूम रहा था तब काफी तेज धुप से सबके चेहरे काले पड़ गए। इसी झुलसाने वाली धुप से मुझे अपनी आगरा यात्रा की याद आ गयी करीब साढ़े तीन साल पहले की।              तो बात है  मई 2012 की। मैं अपने परिवार के साथ आगरा और दिल्ली के लिए निकला था। जमशेदपुर से आगरा हम ट्रेन से पहुचे और होटल में प्रवेश किया। हम दिन के ग्यारह बजे ताजमहल देखने निकल पड़े। होटल के अंदर गर्मी का पता नही चला पर बाहर में अड़तालिस डिग्री वाली तपिश का एहसास हुआ। ऑटो में जब हम बैठे थे तब लू के थपेड़ो से मेरे गले और हाथो में मात्र दो घंटे के अंदर