जैसा की पिछले पोस्टों से विदित है की बिहार में पर्यटन की धुरी बोधगया-राजगीर-नालंदा के इर्द गिर्द ही घूमती है। राजगीर का प्राचीन नाम राजगृह था जो कभी मगध की राजधानी हुआ करती थी, लेकिन बाद में मौर्य शासक अजातशत्रु द्वारा मगध की राजधानी पाटलिपुत्र या आधुनिक पटना स्थानांतरित किया गया। हालाँकि, किस मौर्य शासक ने पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया, इसमें जरा संशय बरकरार है। साथ ही बौद्ध और जैन धर्म से सम्बंधित ऐतिहासिक स्मारक भी राजगीर का महत्व बढ़ा देते हैं। विश्व शांति स्तूप गया से लगभग सत्तर किलोमीटर दूर नालंदा जिले में चारों और से हरी-भरी पहाड़ियों से बोध गया: एक एतिहासिक विरासत (Bodh Gaya, Bihar) दशरथ मांझी: पर्वत से भी ऊँचे एक पुरुष की कहानी (Dashrath Manjhi: The Mountain Man) मगध की पहली राजधानी- राजगीर से कुछ पन्ने और स्वर्ण भंडार का रहस्य (Rajgir, Bihar) नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष: एक स्वर्णिम अतीत (Ruins of Nalanda University) कुम्भरार: पाटलिपुत्र के भग्नावशेष (Kumbhr...
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