पाटलिपुत्र या आज का पटना अपने अन्दर अनेक एतिहासिक विरासतों को समेटा हुआ है। किसी काल में मौर्य शासकों की राजधानी होने के कारण सदा से ही यह शहर एतिहासिक चर्चा एवं अध्ययन का विषय रहा है। लेकिन क्या आपको पता है की इस शहर के इतिहास के बारे हमें इतनी सारी जानकारियां कहाँ से मिली है? आखिर वो कौन सी जगह जिसके गर्भ में प्रभावशाली मगध साम्राज्य के अवशेष दब गए और इतिहास बन गए? और दो-तीन हजार वर्षों बाद भी हमारी उत्सुकता और शोध का विषय बने हुए हैं? कुम्भरार पार्क, पटना प्राचीन काल में पाटलिपुत्र को पाटलिग्राम, पाटलीपुर, कुसुमपुर, पुष्पपुर, कुसुम्ध्वज आदि नामों से विभूषित किया जाता रहा है। छठी सदी पूर्व यह मात्र एक गाँव के रूप में था जिसे निर्वाण से पहले गौतम बुद्ध ने एक निर्माणाधीन दुर्ग के रूप में देखा था। बोध गया: एक एतिहासिक विरासत (Bodh Gaya, Bihar) दशरथ मांझी: पर्वत से भी ऊँचे एक पुरुष की कहानी (Dashrath Manjhi: The Mountain Man) मगध की पहली राजधानी-...
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