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पूर्वोत्तर भारत: इनर लाइन परमिट कैसे प्राप्त करें? (How to Obtain Inner Line Permit for North East India)

यूँ तो अपने देश में एक नागरिक को किसी भी राज्य या भूभाग में बिना किसी रोक-टोक के स्वछन्द यात्रा करने की अनुमति संविधान के द्वारा प्राप्त है, फिर भी बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है की देश के कुछ संवेदनशील इलाके ऐसे भी हैं जहाँ एक आम नागरिक को पहुँचने के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता होती है। यह अनुमति उस क्षेत्र या प्रान्त के स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी की जाती है।


अब तक की गयी यात्राओं में मैंने पाया की सिक्किम के युमथांग घाटी और नाथुला दर्रे और अंडमान निकोबार के कुछ हिस्सों के लिए भी ऐसी परमिट की जरुरत पड़ती है। पहले जम्मू और कश्मीर के लेह जिले के कुछ हिस्सों के लिए भी परमिट आवश्यक था। इस आवश्यकता को जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए एक परिपत्र द्वारा समाप्त कर दिया गया, जो 1 मई 2014 से प्रभावी हुआ, हालांकि विदेशी नागरिकों को इस क्षेत्र के लिए संरक्षित क्षेत्र परमिट प्राप्त करना आवश्यक है। पूर्वोत्तर भारत के तीन राज्यों- अरुणाचल, नागालैंड और मिजोरम के लिए भी ऐसे ही परमिट की जरुरत पड़ती है, फर्क सिर्फ इतना है की इन राज्यों में सम्पूर्ण तौर पर कहीं भी जाने के लिए परमिट की जरुरत पड़ती है, जबकि अन्य राज्यों के मामले में कुछ चुनिंदा इलाकों में ही इसकी जरुरत पड़ती है। 

                            इनर लाइन परमिट (आईएलपी) भारत सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जो एक सीमित अवधि के लिए एक संरक्षित क्षेत्र में भारतीय नागरिक को यात्रा की अनुमति देता है। संरक्षित राज्य में प्रवेश के लिए इनर लाइन परमिट ऐसे राज्यों के बाहर के भारतीय नागरिकों के लिए अनिवार्य है। आईएलपी मूल रूप से अंग्रेजों द्वारा अपने व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था,  लेकिन आजादी के बाद भी भारत सरकार ने इस व्यवस्था को पूर्वोत्तर भारत में आदिवासी संस्कृतियों की रक्षा के लिए जारी रखा। आईएलपी के विभिन्न प्रकार हैं, जो पर्यटकों और अन्य लोगों के लिए हैं, जो लंबे समय तक के लिए रहने का इरादा रखते हैं, अक्सर रोजगार के प्रयोजनों के लिए।

                     पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों में से फ़िलहाल सिर्फ तीन ही राज्यों- अरुणाचल, नागालैंड एवं मिजोरम में परमिट की जरुरत पड़ती है, जबकि अन्य राज्यों में नहीं। राज्य में बाहरी लोगों के प्रवेश को विनियमित करने के लिए असम, मेघालय और मणिपुर में भी आईएलपी की शुरूआत की मांग भी चल रही है। चलिए एक नजर डालते हैं इन राज्यों के लिए परमिट प्राप्त करने के तरीकों के बारे में---

अरुणाचल प्रदेश - अरुणाचल प्रदेश सरकार के सचिव (राजनीतिक) द्वारा जारी असम या नागालैंड के साथ अंतरराज्यीय सीमा में किसी भी चेक गेट के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करने के लिए आवश्यक है। अस्थायी आगंतुकों के लिए एक आईएलपी 30  दिनों के लिए वैध है और इसे बढ़ाया जा सकता है, जबकि राज्य में रोजगार पाने वालों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए एक वर्ष के लिए वैध है। अरुणाचल प्रदेश सरकार परमिट-पर-आगमन प्रणाली को लागू करने की योजना बना रही है। 
         अरुणाचल के लिए परमिट इन शहरों में स्थित कार्यालयों से प्राप्त किया जा सकता है- दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, शिलांग, तेजपुर, जोरहाट। इनके अलावा राज्य के निहारलागुन रेलवे स्टेशन तथा सभी डीसी ऑफिसों से भी प्राप्त किया जा सकता है। परमिट प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका ऑनलाइन है और www.arunachalilp.com इस वेबसाइट से बनाया जा सकता है। जरुरी दस्तावेज भी कुछ ख़ास नहीं बस 
एक पहचान पत्र तथा एक पासपोर्ट साइज फोटो की जरुरत पड़ती है, फीस भी मामूली यानि सिर्फ सौ रूपये ही है।

मिजोरम - मिजोरम सरकार द्वारा जारी अंतरराज्यीय सीमाओं में से किसी भी जांच द्वार के माध्यम से मिजोरम में प्रवेश करने के लिए आवश्यक है। आमतौर पर, आगंतुकों को एक "अस्थायी आईएलपी" जारी किया जाता है, जो 15 दिनों के लिए वैध है, और इसे 15 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है, जिसमें असाधारण परिस्थितियों में एक महीने तक विस्तार करने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय निवासी या सरकारी विभाग के प्रायोजन के साथ, एक "नियमित आईएलपी" खरीदा जा सकता है, जो 6 महीने के लिए वैध है और प्रत्येक और 6 माह के लिए दो बार नवीकृत किया जा सकता है। अस्थायी आईएलपी की फीस 140 रूपये है, पहचान पत्र के साथ तीन पासपोर्ट साइज फोटो भी आवश्यक है। छह माह के वैद्यता वाले आईएलपी की फीस दो सौ रूपये है। 

               अभी तक मिजोरम के परमिट के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं है, और इसे सिर्फ दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, सिलचर और शिलांग स्थित कार्यालयों से ही प्राप्त किया जा सकता है। यदि हवाई मार्ग से कोई आ रहा है, तो आईएजॉल में लेगपाइ हवाई अड्डे पर आगमन पर एक आईएलपी प्राप्त किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए आप इस वेबसाइट पर जा सकते हैं - https://mizoram.gov.in/page/get-in . 


नागालैंड - नागालैंड सरकार द्वारा जारी अन्य राज्यों के भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं के माध्यम से किसी भी चेक गेट के माध्यम से नागालैंड में प्रवेश करना अनिवार्य है। दीमापुर नागालैंड का सबसे बड़ा शहर और राज्य में एकमात्र ऐसा स्थान है जहां आईएलपी की आवश्यकता नहीं है।  नागालैंड के बाकि हिस्सों में भारतीय नागरिकों को भी नागालैंड द्वारा जारी आईएलपी की जरूरत है। दीमापुर से कोहिमा की ओर बढ़ते ही परमिट की जरुरत पड़ जाती है। 
                            नागालेंड के परमिट के लिए देश के चार मुख्य शहरों दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और शिलोंग में नागालैंड हाउस बने है, जहाँ से परमिट प्राप्त किया जा सकता है, इनके अलावा नागालैंड के सभी डीसी ऑफिसों से भी प्राप्त किया जा सकता है। सिर्फ एक पहचान पत्र की जरुरत पड़ती है और पर्यटकों के लिए अधिकतम तीस दिनों तक जारी किया जाता है। आप चाहें तो इस वेबसाइट से आराम से ऑनलाइन भी प्राप्त कर सकते है - http://www.ilp.nagaland.gov.in/ApplyOnline.aspx

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Comments

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (31-07-2017) को "इंसान की सच्चाई" (चर्चा अंक 2682) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया शास्त्री जी

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  2. अच्छी जानकारी दी प्रजापति जी
    भविष्य में काम आएगी

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    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद् रावत जी !!!

      Delete
  3. very informative post for me as I am always looking for new content that can help me and my knowledge grow better.

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  4. मिजोरम आईएलपी की फीस 120 रुपये है। यह मिजोरम के चेकपोस्ट पर हाथोंहाथ भी प्राप्त किया जा सकता है।

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