Skip to main content

हुंडरू जलप्रपात: झारखण्ड का गौरव (Hundru Waterfalls: The Pride of Jharkhand)

झारखण्ड एक पठारी राज्य है और अपने जलप्रपातों के लिए काफी प्रसिद्द है। सबसे अच्छी बात यह है की तीन मुख्य जल प्रपात दशमफॉल, जोन्हा और हुंडरू तो राजधानी रांची के आस-पास ही हैं, बाकि कुछ अन्य प्रपात भी रांची से सौ-डेढ़ सौ किमी के अंदर ही हैं। दशमफॉल की यात्रा के बारे तो मैं लगभग साल भर पहले ही लिख चुका हूँ, जो रांची से मात्र तीस किमी की दूरी पर रांची-जमशेदपुर राजमार्ग संख्या 33 के पास ही स्थित है। जोन्हाफॉल की यात्रा तो कई वर्ष पहले की थी, और यह मेरे गांव से काफी करीब ही है। परन्तु हुंडरू जो की रांची शहर से सटा हुआ है, और रांची में कुछ वर्षों तक रहने के बावजूद भी वर्षों से इसके दर्शन नहीं हो पाए थे। सबसे बड़ा कारण इसका यह भी है की जितने भी प्रपात इस क्षेत्र में हैं, कहीं भी सार्वजनिक परिवहन की कोई सुविधा नहीं है, आपको खुद की गाड़ी या बाइक से ही जाना पड़ेगा। इसलिए जब तक बाइकिंग का नशा परवान न चढ़ा, तब तक सारे जलप्रपात मुझसे अछूते ही थे।

              
झारखण्ड के अन्य पोस्ट:--
  1. चांडिल बाँध - जमशेदपुर के आस पास के नज़ारे (Chandil Dam, Jharkhand)
  2. पारसनाथ: झारखण्ड की सबसे ऊँची चोटी  (Parasnath Hills, Jharkhand)
  3. एक सफर नदी की धाराओं संग (River Rafting In The Swarnarekha River, Jamshedpur)
  4. कुछ लम्हें झारखण्ड की पुकारती वादियों में भी (Dalma Hills, Jamshedpur)
  5. झारखण्ड की एक अनोखी घाटी ( Patratu Valley, Ranchi)
  6. चाईबासा का लुपुंगहुटू: पेड़ की जड़ों से निकलती गर्म जलधारा (Lupunghutu, Chaibasa: Where Water Flows From Tree-Root)
  7. हिरनी जलप्रपात और सारंडा के जंगलों में रमणीय झारखण्ड (Hirni Falls, Jharkhand)
  8. दशम जलप्रपात: झारखण्ड का एक सौंदर्य (Dassam Falls, Jharkhand)
  9. क्या था विश्वयुद्ध-II के साथ झारखण्ड का सम्बन्ध? (Jharkhand In World War II)
  10. जमशेदपुर में बाढ़ का एक अनोखा नमूना (Unforeseen Flood in Jamshedpur)
  11. नेतरहाट: छोटानागपुर की रानी (Netarhat: The Queen of Chhotanagpur)
चूँकि झारखण्ड की सभी नदियाँ बरसाती हैं इसलिए इनके मार्ग में आने वाले जलप्रपात भी  बरसाती ही होते हैं, यानि सारे जलप्रपातों का असली सौंदर्य बारिश के मौसम में ही निखर कर सामने आता है। गर्मी के दिनों में तो ये अस्सी-नब्बे फीसदी तक सूख जाते है, फिर भी जाड़े के मौसम में बहुत हद तक इनमें जान बाकी रहती है और सारे के सारे प्रपात उस समय पिकनिक स्पॉट का रूप धारण कर लेते हैं। मेरे हिसाब से इन्हें जुलाई-अगस्त के महीने में देखना सबसे अच्छा तो है, लेकिन बारिश की वजह से सड़कों की हालत परेशानी का कारण भी बन सकती है। इसी कारण हुंडरू जाने की योजना मैंने बारिश के ठीक बाद अक्टूबर 2016 में बनायी। 

              वर्तमान में मेरा प्रवास जमशेदपुर में है और हुंडरू तक जाने के लिए कम से कम डेढ़ सौ किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। अगर रांची होकर जाऊँ तो एक सौ सत्तर किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। वैसे जाने के लिए तो बहुत सारे रास्ते है। झारखण्ड की लाइफलाइन कही जाने वाली सबसे बड़ी हाईवे संख्या 33 की स्थिति वर्षों से खराब है और यही बाइकिंग में भी सबसे बड़ी बाधा भी। जमशेदपुर से सटे हुए आदित्यपुर में भी एक समय रास्ते बहुत खराब हुआ करते थे, लेकिन आज स्थिति कुछ और ही है। इस एक्सप्रेस हाईवे को पकड़ कर मैं करीब तीस किमी की दूरी तय करके चांडिल नामक छोटे से कस्बे में पहुँचता हूँ, इस प्रकार कुछ देर तक NH 33 बाईपास करके छुटकारा तो मिल गया, पर चांडिल में फिर से मुझे NH 33 मुँह चिढ़ाने लगता है। 

                   चांडिल से या तो NH 33 पकड़ सीधे रांची जाया जा सकता है या फिर एक और बाईपास सड़क जो  कुछ देर तक पश्चिम बंगाल से गुजरेगी और सत्तर किमी दूर मुरी ले चलेगी। यह रांची-पुरुलिया मुख्य मार्ग है और इसकी स्थिति काफी अच्छी है। मुरी का नाम शायद आपने पहले भी सुना हो, एल्युमीनियम उद्योग (हिंडाल्को) के लिए प्रसिद्द है। एल्युमीनियम अयस्क गिरने के कारण यहाँ की भूमि कही-कहीं लाल दिखाई पड़ती है। मुरी से उत्तर दिशा में रांची पुरुलिया रोड पर ही जोन्हा एवं हुंडरू- दोनों प्रपातों के रास्ते खुलते हैं। बीस किमी बाद बाएं मुड़ने पर जोन्हा का रास्ता है, जबकि तीस किमी बाद दाएं मुड़ने पर हुंडरू का। दोनों प्रपातों के मध्य सिर्फ तीस किमी का ही फासला है। लेकिन एक ही दिन दोनों का दीदार ढंग से कर पाना बहुत मुश्किल है। इधर सड़कें बिल्कुल चकाचक है, दोनों तरफ हरियाली है।

           झारखण्ड के अधिकतर जलप्रपातों के चारों ओर मुख्यतः पलास के जंगल पाए जाते हैं। हुंडरू फॉल झारखण्ड के सबसे बड़े जलप्रपातों में से एक है और इसकी ऊंचाई करीब 320 फ़ीट है। वैसे झारखण्ड का सबसे ऊँचा प्रपात नेतरहाट से 70 किमी दूर स्थित लोध फाल्स है,लेकिन दुर्गम होने के कारण वह अधिक प्रसिद्द नहीं हो पाया है, हुंडरू ही झारखण्ड के सबसे ऊँचे प्रपात रूप विख्यात है। रांची के पास से निकलने वाली स्वर्णरेखा नदी जब उबड़-खाबड़ पठारी मार्गों से गुजरते हुए ओरमांझी नामक स्थान के आस-पास एक पहाड़ी से गिरती है, तब इस प्रपात का निर्माण होता है। ऊंचाई के मामले में हुंडरू देश का चौंतीसवाँ सबसे ऊँचा प्रपात है। 

                            अक्टूबर के महीने में यहाँ भीड़ कोई खास तो नहीं  थी, फिर भी पर्यटकों की संख्या को नजरअंदाज नहीं किया सकता था। झारखण्ड का एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र होने के कारण यहाँ वाहन पार्किंग, प्रसाधन, जलपान वगैरह की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। प्रवेश टिकट के नाम पर पांच रूपये की मामूली फीस वसूली जाती है। दशमफाल की तरह ही यहाँ भी प्रपात के पास जाने के लिए हजारों सीढ़ियों से होते हुए नीचे जाना पड़ता है। बीच-बीच में कुछ स्थानीय बच्चे बांस और लकड़ी के बने कुछ कलाकृतियां बेचते हुए नजर आते हैं। अगर दस-बीस रूपये का भी कुछ इनसे खरीद लिया जाय, तो उनके चेहरे पर ख़ुशी स्पष्ट झलक आती है।

                नीचे तक पहुंचने में लगभग पंद्रह मिनट का वक़्त लगा, वापस चढ़ने में भी निश्चित रूप से इससे अधिक वक़्त लगेगा। जलप्रपात की धारा अभी कुछ मध्यम सी थी, फिर भी नज़ारे सुंदर थे। जिस स्थान पर पानी की धारा गिरती है, वहां एक छोटे से प्राकृतिक तरण -ताल का निर्माण हो गया है, जिसमें डुबकी भी लगाया जा सकता है। अगर आप थक गए हों तो लकड़ी के बने एक छोटे से झोपडी में आराम फरमाते हुए प्रपात का आनंद ले सकते हैं। एक बात यहाँ अच्छी लगी की हुंडरू अधिक ऊँचा होने के बावजूद दशमफाल जैसा खतरनाक नहीं है। दशमफाल में आये दिन अनेक दुर्घटनाओं की खबरें आती रहती हैं। 

                कुछ घंटों की मस्ती और फोटोग्राफी कर फिर से ऊपर चढ़ने का वक़्त आ गया। इस बार चढ़ने में पच्चीस मिनट का वक़्त लगा। हुंडरू के साथ बिताये पलों को याद करते हुए अब वापस घर की ओर.... 

हुंडरू फॉल की कुछ यादें:---


















इस हिंदी यात्रा ब्लॉग की ताजा-तरीन नियमित पोस्ट के लिए फेसबुक के TRAVEL WITH RD पेज को अवश्य लाइक करें या ट्विटर पर  RD Prajapati  फॉलो करें साथ ही मेरे नए यूंट्यूब चैनल  YouTube.com/TravelWithRD भी सब्सक्राइब कर लें। 

झारखण्ड के अन्य पोस्ट:--

  1. चांडिल बाँध - जमशेदपुर के आस पास के नज़ारे (Chandil Dam, Jharkhand)
  2. पारसनाथ: झारखण्ड की सबसे ऊँची चोटी  (Parasnath Hills, Jharkhand)
  3. एक सफर नदी की धाराओं संग (River Rafting In The Swarnarekha River, Jamshedpur)
  4. कुछ लम्हें झारखण्ड की पुकारती वादियों में भी (Dalma Hills, Jamshedpur)
  5. झारखण्ड की एक अनोखी घाटी ( Patratu Valley, Ranchi)
  6. चाईबासा का लुपुंगहुटू: पेड़ की जड़ों से निकलती गर्म जलधारा (Lupunghutu, Chaibasa: Where Water Flows From Tree-Root)
  7. हिरनी जलप्रपात और सारंडा के जंगलों में रमणीय झारखण्ड (Hirni Falls, Jharkhand)
  8. दशम जलप्रपात: झारखण्ड का एक सौंदर्य (Dassam Falls, Jharkhand)
  9. क्या था विश्वयुद्ध-II के साथ झारखण्ड का सम्बन्ध? (Jharkhand In World War II)
  10. जमशेदपुर में बाढ़ का एक अनोखा नमूना (Unforeseen Flood in Jamshedpur)
  11. नेतरहाट: छोटानागपुर की रानी (Netarhat: The Queen of Chhotanagpur)

Comments

  1. बढ़िया यात्रा वैसे नाम ही खतरनाक है..मुरी शायद बड़ा रेलवे जंक्शन भी है

    ReplyDelete
    Replies
    1. खतरनाक हा हा हा....
      मुरी एक जंक्शन ही है।

      Delete
  2. बढिया यात्रा

    ReplyDelete
  3. धन्यवाद शास्त्री जी

    ReplyDelete
  4. Hey keep posting such good and meaningful articles.

    ReplyDelete
  5. शानदार जल प्रपात है ! चांडिल तो शायद ट्रेन भी चलती है जमशेदपुर से , हमें लौटते हुए दिखाई दिया था वहां का रेलवे ट्रेक !

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी हाँ जमशेदपुर से चांडिल की ट्रेन भी है...

      Delete
  6. Great article, Thanks for your great information, the content is quiet interesting. I will be waiting for your next post.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Which is the best berth in trains: Lower, Middle or Upper?

Which is the best berth in trains? You have mainly three choices in trains: lower, middle and upper berths. There are also side lower and side upper berths. In this post, we will be going to discuss about advantages and disadvantages of different types of train berths. However, different types of travelers may need or prefer a particular type of berth according to their ages, interests or physical conditions. Top 5 Flight Booking Sites in India for Domestic & International flights As you already know that there are many types of coaches in Indian trains like general, 2nd seating, AC chair car, sleeper, 3rd AC, 2nd AC and 1st AC. The general, 2nd seating or AC chair car coaches do not have the facility of sleeping. They are best suitable for day time journey. Thereafter, sleeper, 3rd AC, 2nd AC and 1st AC coaches have the facility of sleeping and comfortable for long and very long overnight journeys. The berths orientation in the sleeper and 3rd AC coaches are exactly same, only dif...

अंडमान यात्रा का कार्यक्रम कैसे बनायें? (How to plan Andman Trip)

दोस्तों अब तक मैंने अंडमान के लगभग सारे मुख्य स्थानों के बारे अपना यात्रा वृतांत आपके साथ साझा कर दिया है। फिर भी संक्षिप्त रूप में एक और पोस्ट लिख रहा हूँ ताकि आपको भी अंडमान का कार्यक्रम बनाने में कुछ मदद मिल सके। अंडमान मुख्य भूमि से काफी दूर है, इसलिए ढेर सारे लोगों के मन में ये दुविधा जरूर रहती है की अंडमान कैसे जाएँ, कार्यक्रम कैसे बनायें, अंडमान तो खर्चीला होगा आदि आदि।

A Brief Guide to Puri, Konark, Bhubaneshwar and Chilika Lake

In 2011, I met with the western part of India, i.e., Mumbai and Goa. So, in January 2012, I decided to explore the eastern side. So, Puri was the most eligible place. Puri is just 8 hrs train journey away from my city Jamshedpur (Tatanagar). Puri has a lot to be explored. Within the city, the golden beaches are the worth visit. But, apart from beaches, Puri is a famous pilgrimage center, one of the Char Dhaam . The Jagannath Temple is the center of attraction, however, there are a lot of other temples. My 10 Days Itinerary for Andman Trip How to Plan Andman Nicobar Trip Bodh Gaya: The top reason to visit Bihar The golden triangle Puri-Konark-Bhubaneshwar needs a whole day to complete. You can either catch a regular tourist bus or hire a full day taxi . The full circuit is about 150 km long including Konark, Dhouli Giri, Udaygiri & Khandgiri, Lingaraj Temple and finally the Nandan-Kanan park. The Chilika Lake is another attraction but 55 km far from the city. It’s the largest bra...