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डॉन बोस्को म्यूजियम: एक ही छत के नीचे सम्पूर्ण पूर्वोत्तर भारत (Don Bosco Museum, Shillong, Meghalaya)

म्यूजियम या संग्रहालय तो आपने बहुत सारे देखे होंगे, कुछ छोटे तो कुछ बड़े। अधिकतर संग्रहालयों में पुरातत्व से संबंधित चीजें ही रखी होती है, आजकल के कुछ आधुनिक संग्रहालयों में कला-संस्कृति से जुड़े ऑडियो-विज़ुअल प्रदर्शन भी दिखाए जाते हैं। पूर्वोत्तर भारत के शिलोंग स्थित ऐसा ही एक बहुत बड़ा आधुनिक संग्रहालय स्थित है जो न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया का ही सबसे बड़ा सांस्कृतिक संग्रहालय है। अगर आपके पास पूरा पूर्वोत्तर भारत घूमने का समय नहीं है, तो चले आईये डॉन बोस्को सेंटर फॉर इंडीजेनियस कल्चर्स या Don Bosco Centre for Indigenious Cultures (DBCIC) जिसे बोलचाल की भाषा में डॉन बोस्को म्यूजियम भी कहा जाता है।


  मेघालय के पिछले पोस्ट:


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 डॉन बोस्को म्यूजियम का निर्माण रोमन कैथोलिक सेलेसियन सोसाइटी द्वारा बनवाया गया था और इसका नाम डॉन बोस्को नामक इटली के एक मशहूर रोमन कैथोलिक संत के नाम पर ही रखा गया है। शिलांग मुख्य शहर के केंद्र से इस म्यूजियम की दूरी कोई दस किमी होगी लेकिन वहां तक कोई सार्वजनिक आवागमन की सुविधा न होने के कारण ऑटो या टैक्सी का ही सहारा लेना पड़ता है। इस म्यूजियम में सातों पूर्वोत्तर राज्यों से जुडी कलाकृतियां, जनजातियों के रंग-रूप, रहन-सहन, संगीत, हथियार, खान-पान आदि के बारे बड़ा ही सुन्दर प्रदर्शन किया गया है। पूर्वोत्तर भारत को करीब से जानने और समझने के लिए ये जगह काफी मददगार है, अगर एक बार आप कभी शिलांग आएं, तो यहाँ जरूर आएं। 

सात मंजिले इस संग्रहालय में लगभग बीस गलैरियाँ हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-
अलकोव्स गैलरी (Alcoves Gallery): मेहराबदार बरामदे में कुल 22 अल्कोव हैं, हर चीज कांच से ढंकी है और साथ में कंप्यूटर भी लगे हुए है, जिनमें आप क्विज खेल सकते हैं और पूर्वोत्तर भारत के बारे बहुत कुछ पढ़ सकते हैं। सभी पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न प्रकार के जनजातियों की मूर्तियां भी लगी हुई है, जो आपका स्वागत करेंगी। 

मिनी म्यूजियम (Mini Museum): यह बच्चों के खेलने लिए है, जिस वक़्त अभिभावक अन्य गैलेरियों को देख सकते हैं। 

पड़ोसी गैलरी (Our Neighbours Gallery): यह पूर्वोत्तर भारत के पडोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान, चीन, म्यंमार और बांग्लादेश के बारे बताता है। एक टच स्क्रीन कंप्यूटर की मदद से हर देश के बारे आधारभूत जानकारी मिल जाएगी। 

फोटो गैलरी (Photo Gallery): इसमें उत्तर-पूर्व भारत के कुछ दुर्लभ फोटो रखे गए हैं। ब्लैक एंड वाइट फोटो पचास-साठ साल पुराने हैं, जबकि रंगीन वाले नए हैं। 

मिशन और कल्चर गैलरी (Mission & Culture Gallery): इसे देखने के लिए कुछ घंटे लगेंगे। हमें सभी संस्कृतियों से प्यार है- इस गैलरी का मुख्य थीम है। नृत्य और आभूषणों से सजा हुआ है। मेघालय वाले गैलरी में एक लकड़ी से बने चर्च का जिक्र है, जिसे 1936 में जला दिया गया था। 

प्रागेतिहासिक गैलरी (Pre-Historic Gallery): भारत के पूर्वोत्तर हिस्से के जनजातियों के दक्षिण-पूर्व एशिया में महत्व एवं उनके विकास के विभिन्न चरणों को दिखाया गया है। 

लैंड एंड पीपल गैलरी (Land and People Gallery): इसमें पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक स्वरुप और जनजातियों के रूपों को दिखाया गया है। 

मतस्य, शिकारी, संग्रहण गैलरी (Fishing, Hunting & Gathering Gallery): मछली पकड़ने, शिकार करने तथा उन्हें रखने के लिए विभिन्न प्रकार के औजारों को दिखाया गया है। 

कृषि गैलरी (Agricultural Gallery): सदियों से पूर्वोत्तर भारत के लोगों द्वारा खेती करने के विभिन्न तरीकों को दिखाया गया है- जैसे झूम कृषि, सीढ़ीनुमा खेती, वर्षा खेती आदि। 

परंपरा एवं प्रौद्योगिकी गैलरी (Traditional & Technology Gallery): यह ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक गतिविधियों तथा परम्पराओं को दर्शाता है। 

टोकरी गैलरी (Basketery Gallery): बांस और घास-फूस के बने अनेक प्रकार के आकर्षक टोकरियों को आपने जरूर देखा ही होगा, यह उसी को समर्पित है। 

वाद्य यंत्र गैलरी (Musical Instruments Gallery): यहाँ आप पूर्वोत्तर भारत के संगीत सुन सकते हैं और उनके वाद्य यंत्रों को देख सकते हैं। 

धर्म एवं सांस्कृतिक गैलरी (Religion and Culrute Gallery): विभिन्न धर्मों एवं सभ्यताओं के बारे। 

हथियार गैलरी (Weapons Gallery): यह पाषाण काल से लेकर आज तक इस्तेमाल किये गए विभिन्न हथियारों को दिखाता है, मानव समाज के आज तक के संघर्ष को दिखाता है। 

वेश-भूषा एवं आभूषण गैलरी (Costumes & Ornaments Gallery): यह पूर्वोत्तर भारत में इस्तेमाल किये जाने वाले विभिन्न परिधानों तथा आभूषणों को दिखाता है। 

डॉन-बोस्को कल्चर गैलरी (Don Bosco & Culture Gallery): यह दुनिया के पांचों महाद्वीपों में डॉन बोस्को द्वारा किये गए शिक्षा के प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक योगदान को दर्शाता है। आज डॉन बोस्को (1815-1888) के योगदान को 132 देशों में देखा जा सकता है।

हाउसिंग पैटर्न गैलरी (Housing Pattern Gallery): इसमें पूर्वोत्तर भारत में विभिन्न प्रकार के घर बनाने की शैली को दिखाया गया है। 

कला गैलरी (Art Gallery): पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों के पेंटिंग्स और हस्त कलाओं का संकलन है। 

मीडिया एवं कल्चर गैलेरी (Media & Culture Gallery): यह सबसे अंतिम पड़ाव है, यहाँ एक छोटी सी फिल्म दिखाई जाती है। 

स्काईवाक (Skywalk): भवन के छत पर चढ़कर आप पुरे शिलांग शहर का नजारा देख सकते हैं। 


इस प्रकार म्यूजियम का सफर खत्म होता है, कुछ अन्य जानकारियों को भी ध्यान में रख लें-
खुलने का समय- सोमवार से शनिवार, ग्रीष्मकाल में सुबह नौ से शाम साढ़े पांच बजे तक, शीतकाल में सुबह नौ से शाम साढ़े चार बजे तक। प्रवेश शुल्क सौ रूपये, कैमरा शुल्क अलग। 
मेरे पास कुछ ही गैलेरियों के फोटो हैं-
 प्रवेश द्वार 


अल्कोवस गैलरी 






स्काईवाक से शिलांग का नजारा 









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Comments

  1. जानकारी के साथ सुन्दर चित्र

    ReplyDelete
  2. बहुत बहुत शुक्रिया सिन्हा जी

    ReplyDelete
  3. पर्यटको के लिए पूरी जानकारी है इस लेख मे ।

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  4. ग़ज़ब की जानकारी

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद् प्रतिक जी

      Delete
  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (28-05-2017) को
    "इनकी किस्मत कौन सँवारे" (चर्चा अंक-2635)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया शास्त्री जी

      Delete
  6. मैंने भी यह म्यूजियम देखा है. वाकई यह बेजोड़ है.

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    Replies
    1. धन्यवाद ओंकार जी

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  7. मुझे नहीं मालूम था इसके बारे में ! अच्छी जगह दिखाई आपने , कभी आगे जाने का अवसर मिला तो अवश्य जाऊँगा यहां भी !!

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