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मिशन लद्दाख-4: मनाली से भरतपुर (Mission Ladakh: Manali to Leh via Rohtang Pass-Keylong-Jispa-Darcha-Zingzingbar-Baralachala-Bharatpur)

24 जुलाई, 2016. आज हमारे मिशन लद्दाख का तीसरा दिन था, और अब तक हम जमशेदपुर से दिल्ली तक 1400 किमी ट्रेन से तथा  दिल्ली से बाइक से 400 किमी तय कर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर तक पहुँच चुके थे। पिछली रात ही दो बजे हम आये, और मात्र चार घंटे की नींद लेकर उधर अगले दिन यानि आज सुबह-सुबह छह बजे ही मनाली के लिए निकलना भी था, क्योंकि आज रविवार था और मनाली में बाइक का परमिट भी बनवाना था, कार्यालय दोपहर बारह बजे तक ही खुला रहने वाला था, अभी भी मनाली 180 किमी दूर था, जिसे तय करने में कम से कम  चार घंटे तो लगने ही लगने थे।

व्यास नदी: मनाली की ओर
  1.  मिशन लद्दाख-1: तैयारियाँ (Preparing for Mission Ladakh)
  2. मिशन लद्दाख-2: दिल्ली से मनाली  (Mission Ladakh: Delhi to Manali)
  3. मिशन लद्दाख-3: मनाली में बाइक का परमिट (Mission Ladakh: Obtaining Bike Permit in Manali)
  4. मिशन लद्दाख-4: मनाली से भरतपुर (Mission Ladakh: Manali to Leh via Rohtang Pass-Keylong-Jispa-Darcha-Zingzingbar-Baralachala-Bharatpur) 
  5. मिशन लद्दाख-5: भरतपुर से लेह (Mission Ladakh: Bharatpur-Sarchu-Nakeela-Biskynala-Lachungla-Pang-Debring-Tanglangla-Upshi-Leh
  6. मिशन लद्दाख-6: शे गुम्पा, लेह महल, शांति स्तूप और हॉल ऑफ़ फेम (Mission Ladakh: Leh Palace and Hall of Fame)
  7. मिशन लद्दाख-7: मैग्नेटिक हिल का रहस्य और सिंधु-जांस्कर संगम (The Mysterious Magnetic Hill & Sindhu-Janskar Confluence)
  8. मिशन लद्दाख-8: रेंचो स्कूल (Mission Ladakh-8: Rancho School)
  9. मिशन लद्दाख-9: चांगला से पेंगोंग (Chang La to Pangong Tso)
  10. मिशन लद्दाख-10: पेंगोंग से नुब्रा और खारदुंगला (Pangong to Nubra and Khardungla)                                 
 बिलासपुर से काफी पहले ही पहाड़ी रास्ते शुरू हो चुके थे, इसीलिए अब हवा में हिमालयी ताजगी भी आने लगी थी, सिर्फ तीन-चार घंटे की नींद लेकर ही हम फिर से तरो-ताजा हो चुके थे। हमारे साथ कार में जाने वाले ऑनलाइन परमिट बनवा चुके थे, इसीलिए उनको आज जल्दी मनाली पहुचने की कोई हड़बड़ी न थी, लेकिन बाइक का परमिट ऑनलाइन नहीं बनता, इसीलिए हमें आज जल्द से जल्द पहुंचना था। इसीलिए कार वाले सोते रहे, हम चार बाइकर निकल पड़े।

                              कल रात इन पहाड़ों में चढ़ते वक़्त अँधेरा हो चुका था, इसीलिए रास्ते भली-भांति दिखाई नहीं  पड़े थे, पर अभी इनका असली सौंदर्य सामने आ गया था। बिलासपुर से आगे का रास्ता भी बहुत ही अच्छा  था, पहाड़ी रास्तों पर भी आराम से पचास-साठ की फर्राटे की गति के साथ ही अगले दो-ढाई घंटे में हम हिमाचल के एक अन्य बड़े शहर मंडी तक आ चुके थे, साथ ही व्यास नदी भी अब हमारे साथ बहने लगी थी। इस प्रसिद्द नदी के किनारे रूककर कुछ फोटो भी लेने का भी कोई मौका हमने न छोड़ा। मंडी के बाद अगला बड़ा शहर कुल्लू, साठ-सत्तर किमी बाद  है,लेकिन कुल्लू से तीस किमी पहले एक तीन किलोमीटर लंबी सुरंग भी है, इसे औत सुरंग कहा जाता है। इस सुरंग अंदर प्रवेश करते ही अँधेरा सा छा गया, बिजली के बल्बों की रोशनी काफी न थी, एक बाइकर के लिए तो मुझे यह जोखिमभरा ही लगा। अंदर धूल भी उड़ती है, इसीलिए यहाँ काफी सावधानी से हम आगे बढे, सुरंग पार करने में करीब दस मिनट का वक़्त लगा।

बिलासपुर से मनाली का मार्ग

                                                               एक बार फिर से व्यास नदी के किनारे किनारे सरपट बाइक दौड़ाते हुए आधे घण्टे के अंदर हम कुल्लू से गुजर रहे थे। कुल्लू का भी नाम पहले से काफी सुन रखा था, मनाली के सबसे करीब का हवाई अड्डा तो कुल्लू में ही है।  कुल्लू से अगले चालीस किमी बाद मनाली है, जहाँ हमें सीधे एसडीएम ऑफिस ही चले जाना था, ताकि समय रहते हम बाइक परमिट बनवा सकें। सुबह के ग्यारह बजे हम परमिट लेने वालों की लाइन में लग चुके थे। परमिट बनवाने के बारे मैं जरा विस्तार से बताता हूँ।

                        मनाली में रोहतांग के लिए वाहनों का परमिट

मनाली में रोहतांग पास के लिए दो तरह के परमिट बनते है एक रोहतांग तक (Upto Rohthang, Tourism Purpose) जाने लिए, दूसरा रोहतांग पार (Beyond Rohthang, Travel Purpose) जाने के लिए। वैसे लोग जो सिर्फ मनाली घूमने के लिए आते है, वो सिर्फ रोहतांग देखने जाते है और सिर्फ रोहतांग तक का ही परमिट बनवाते हैं। जबकि रोहतांग पार यानि लेह या लाहौल-स्पिति जाने वाले रोहतांग पार का परमिट बनवाते हैं।


                                 रोहतांग तक का परमिट ऑनलाइन ही बनवाया जा सकता है, लेकिन सिर्फ चार पहिये वाहनों का ही। रोजाना आठ सौ डीजल और चार सौ पेट्रोल गाड़ियों को इजाजत दी जाती है। ऑनलाइन परमिट के लिए आप हिमाचल प्रदेश के इस वेबसाइट http://admis.hp.nic.in/ngtkullu/ पर जा सकते है। परमिट शुल्क पांच सौ रूपये है, साथ ही कॉन्जेसन शुल्क पचास रूपये है जो गुलाबा चेक पोस्ट पर ही देना होता है।

                  बाइक के लिए परमिट का कोई शुल्क नहीं है, पर ऑनलाइन सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है, इस कारण आपको सीधे एसडीएम ऑफिस ही जाना पड़ेगा। साथ ही रोहतांग पार जाने वाले चार पहिये वाहनों के लिए भी ऑनलाइन परमिट की सुविधा नहीं है। यह कार्यालय सोमवार से शनिवार तक सुबह दस शाम पांच बजे तक खुला है, जबकि रविवार को दोपहर बारह बजे तक, महीने के हर दूसरे शनिवार को कार्यालय बंद रहता है। परमिट बनवाने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की जरुरत पड़ेगी -

 (1) गाड़ी पंजीयन प्रमाण पत्र (VEHICLE REGISTRATION CERTIFICATE)
 (2) ड्राइविंग लाइसेंस (DRIVING LICENSE)
 (3) प्रदूषण प्रमाण पत्र (POLLUTION CERTIFICATE)
 (4) एक भारतीय नागरिक पहचान पत्र (IDENTITY CARD)

नॉट: दस साल से पुराने वाहनों को ले जाने की अनुमति नहीं है और मंगलवार को परमिट जारी नहीं किया जाता क्योकि इस दिन सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा मरम्मत का काम किया जाता है।

कुछ ही देर में परमिट हमारे हाथ में था और हम अपने होटल में दाखिल हो चुके थे। आज तो मनाली में ही  रुकना था, इसीलिए अब कोई हड़बड़ी न थी। शाम को हमनें अपनी-अपनी बाइकों की खूब साफ़-सफाई की, कुछ जरुरी मरम्मत कर अगले दिन के और भी कठिन यात्रा के लिए तैयार कर लिया। हल्का-हल्का अँधेरा होने हम सबने मनाली के मॉल रोड का खूब भ्रमण किया, हिडिम्बा मंदिर का भी दौरा किया। सालोंग घाटी के बारे भी पता तो था, पर उसी दिन जाना अब संभव नहीं था। रात दस बजे हम वापस होटल आये, नींद भी भरपूर लेनी थी, अगले दिन लेह निकलने के लिए। क्रमशः।

 व्यास नदी के किनारे

  व्यास नदी






 खूबसूरत मनाली


 सेब के पेड़

 हमारी टीम
 हमारे बाइक: लद्दाख के लिए अब तैयार
मॉल रोड: मनाली
हिडिम्बा मंदिर, मनाली



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Comments

  1. "Wow" feeling RD...
    Keep it up.

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  2. राम भाई बहुत बढ़िया लिखा। अगले पोस्ट का इन्तजार रहेगा।

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  3. Bohat badiya hai sirji.
    Agali post ka intajar hai

    ReplyDelete
  4. Bohat badiya hai sirji.
    Agali post ka intajar hai

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  5. लेह की पहले भी कई यात्राएं पढ़ी हैं लेकिन आपके वृतांत में सब कुछ स्पष्ट है ! रोहतांग के कुछ और फोटो की उम्मीद थी , एक ही फोटो में मामला ख़त्म कर दिया ? पूरे रास्ते टेंट और ढाबे में रुकने की सुविधा है , ये बहुत बढ़िया जानकारी मिली !!

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    Replies
    1. योगीजी, दरअसल शुरू के तीन-चार फोटो तो रोहतांग के ही हैं, लेकिन बर्फ के अभाव में ऐसे लग नही रहे. और ठंडी हवाओं के कारण भी हम ज्यादा देर वहां नही रुके.
      धन्यवाद योगी जी

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  6. बहुत बढ़िया चल रही है यात्रा

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    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका

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  7. बहुत बढ़िया चल रही है यात्रा

    ReplyDelete
  8. हम जब मई में गुलाबा तक गए थे तो बहुत बर्फ थी हमको आगे जाने नहीं दिया।और 2 बजे ही हम लौटने लगे क्योकि अँधेरा छाने लगा था।

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    1. जी, मई तक हो सकती है बर्फ, पर पिघलते-पिघलते जुलाई में पूरी तरह से खत्म हो जाती है!

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  9. RD jee ek petrol pump se dusre ki duri 365 km matlab ki petrol ki tanki khali, par hausala khali nahi hona chaiye

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    1. हाँ जी बिलकुल ऐसा ही

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  10. Thanks for this beautiful post which has been shared by you in this post it is really an interesting one. I love to visit the Shimla Kullu Manali very often when i get the holidays.
    http://www.shimlakullumanalihoneymoon.com/

    ReplyDelete

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